﻿  ﻿ मानवाधिकार के लेल संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त सब के लेल मानवाधिकार मानवाधिकार घोषणा के पचासवां वर्षगांठ 
  1948 . 1998 
  10 दिसम्बर, 1948 के संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाएल और घोषित मानवाधिकार 
  प्राक्कथन 
  सभे के ओकर उचित सम्मान तथा मानव परिवार के सब सदस्य के बराबरी के हक ही विश्व समुदाय के स्वतंत्राता, न्याय और शांति के बुनियाद ह‌ई। 
  मानवाधिकार के उल्लंघन हरदम से अमानवीय काम के बजह से ही होव ह‌ई। जेकरा से मानवता के अंतकरण दुः खी होव ह‌ई। एक आम आदमी के सबसे बड़ा इच्छा इहे होव ह‌ई कि ए दुनिया में ओकरा भाषण और विचार के आजादी मीले साथ ही भय और इच्छा से भी मुक्ति मीले। 
  यदि कोइयो तानाशाही या दमन के खिलाफ बगावत करे लेले मजबूर ह‌ई त ओकरा कानून से ओकर मानवाधिकार के सुरक्षा के इंतजाम होए के चाहीं। इहो आवश्यक ह‌ई कि राष्ट्र सब के बीच दोस्ती बढ़ाएल जाए। 
  संयुक्त राष्ट्र के लोग सब अपन चार्टर में मौलिक मानवाधिकार, मानव के सम्मान और उपयोगिता तथा आदमी और औरत के बराबर अधिकार के प्रति अपन विश्वास जतेलक‌ई हन। साथ ही उ आर स्वतंत्राता के माहौल में सामाजिक प्रगति तथा जीवन के स्तर के बढ़ावे लेल भी दृढ़ निश्चय कएलक‌ई हन। 
  साथ में सदस्य राष्ट्र सब संयुक्त राष्ट्र के मदद से मानवाधिकार और मौलिक स्वतंत्राता के प्रति लोग सब में इज्जत बढ़ावे लेल भी संकल्प लेलकए हन। 
  एहि से इ संकल्प के प्राप्ति के लेल इ सब अधिकार और स्वतंत्राता के समझ रहना सबसे जरूरी ह‌ई। 
  अब, एही से, 
  महासभा, 
  ई एलान कर ह‌ई, कि मानवाधिकार के इ घोषणा के सब लोग और सब राष्ट्र पालन करे। सब व्यक्ति और समाज के सब अंग इ घोषणा के अपन इमाम में रखे। संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राष्ट्र के लोग सब के बीच या उनकर अधिकार क्षेत्रा में रहे वाला लोग के बीच प्रगतिशली कदम से या शिक्षा के माध्यम से इ सब अधिकार और स्वतंत्राता के प्रति सम्मान जगाल‌ई के चाही। 
  अनुच्छेद 1 
  सब लोग आजादे जन्म लेब ह‌ई तथा सब के बराबरे सम्मान और अधिकार ह‌इ। 
  हुनखो के पास समझ-बूझ और अंतः करण के आवाज होब ह‌ई। और हुनका दोसरो के साथ भा‌ईचारा के व्यवहार करे पड़ ह‌ई। 
  अनुच्छेद 2 
  बिना कोनो जाति, रंग, लिंग, भाषा धर्म, राजनीतिक, और दोसरो मान्यता, राष्ट्रीयता या सामाजिक मूल, धन संपत्ति, जन्म या दोसर स्थिति के भेदभाव के सभे कोई उ घोषणा में लिखल अधिकार और आजादी के हकदार होइथिन। 
  अनुच्छेद 3 
  सब के जिंदगी, स्वतंत्राता और आत्म सुरक्षा के अधिकार ह‌ई। 
  अनुच्छेद 4 
  केकरो भी गुलाम बना के ना रखल जा सक ह‌ई। कोनो रूप में गुलामी और गुलाम के व्यापार पर सख्त पाबंदी ह‌ई। 
  अनुच्छेद 5 
  केकरो साथ क्रूर, अमानवीय या घृणित व्यवहार ना कएल जा सक ह‌ई। केकरो सताएल या सजना देल जा सक ह‌ई। 
  अनुच्छेद 6 
  सब के कानून के सामने सब जगह एक आदमी के रूप में पहचानल जाए के अधिकार ह‌ई। 
  अनुच्छेद 7 
  कानून के सामने सब कोई बराबर ह‌ई। तथा बिना कोनो भेदभाव के कानून से समान संरक्षण प्राप्त करे के अधिकार ह‌ई। तथा इ घोषणा के उल्लंघन होएला पर या भेदभाव के स्थिति में सब के समान संरक्षण प्राप्त करे के अधिकार ह‌ई। 
  अनुच्छेद 8 
  संविधान या कानून द्वारा देल गेल सब मौलिक अधिकार के उल्लंघन होला पर सब के कोई अच्छा राष्ट्रीय संगठन से क्षतिपूर्ति प्राप्त करे के अधिकार ह‌ई। 
  अनुच्छेद 9 
  केओ के भी बिना कारण के कैद, अज्ञातवास या देश निकाला न देल जा सक ह‌ई। 
  अनुच्छेद 10 
  केकरो खिलाफ आपराधिक मामला होए अथवा केओ के सब अधिकार और कर्तव्य के निर्धारण के सिलसिला में कौनो स्वतंत्रा और निष्पक्ष ट्रा‌इब्यूनल के समक्ष निष्पक्ष सुनवा‌ई के समान अधिकार मिलल ह‌ई। 
  अनुच्छेद 11 
  केओ के भी कानून जब तक दोषी ना कह देत ह‌ई तब तक ओकरा बेगुनाहे समझल जाए के चाही। 
  चाहे ओकरा खिलाफ आपराधिक मामला ही काहे ना चल रहल होए। इ सुनवा‌ई के दौरान अपन बचाव के लेल ओकरा पूरा-पूरा हक भी मिलत‌ई। 
  कौनो राष्ट्रीय या अन्तर्राष्ट्रीय कानून के तहत कोनों काम के दंडनीय अपराध ना मानल जा रहल‌ई हन त कौनो आदमी के उ काम के लेल दोषी ना करार देल जा सक ह‌ई। 
  अनुच्छेद 12 
  केओ के नीजि जीवन, परिवार, घर तथा पत्राचार आदि में कौनो के भी हस्तक्षेप करे के अधिकार ना ह‌ई। न ही कोई के ओकर सम्मान और प्रतिष्ठा पर हमला करे के अधिकार ह‌ई। सब के अ‌इसन हस्तक्षेप और हमला के खिलाफ कानून से संरक्षण प्राप्त करे के अधिकार ह‌ई। 
  अनुच्छेद 13 
  सब के अपन राज्य के सीमा के अंदर मकान बनावे के तथा एक जगह से दोसर जगह जाए के अधिकार हए। सब के कोई भी देश इहाँ तक कि अपन भी छोड़े और वापस लौटि के आबे के अधिकार ह‌ई। 
  अनुच्छेद 14 
  प्रताड़ना से बचे खातिर दोसर देश में संरक्षण प्राप्त कर